चिलचिलाती धूप में एक शामियाना चाहता हूं ।
तेरी ज़ुल्फों में सनम एक आशियाना चाहता हूं ।।
उफ ये कैसा आज कार ए मुजरिमाना चाहता हूं ।
एक जलवा जलवागर से दिलरूबाना चाहता हूं ।।
अपने हाथों ख़ुद ही अपना दिल गवाना चाहता हूं ।
ज़िंदगी ! मैं सिर्फ तुमसे दोस्ताना चाहता हूं ।।
करदे छलनी जो जिगर को दिल को जो मसहूर कर दे ।
वार ऐसा उस नज़र से क़ातिलाना चाहता हूं ।।
ना कविता का दिवाना ना ग़ज़ल आशिक़ ही मैं हूं ।
तेरे हर एक सुर में अपना सुर मिलाना चाहता हूं ।।
आंखों से अशआर कहना आपको आता है ख़ूब ।
बोल तेरे लब पे भी कुछ शाइराना चाहता हूं ।।
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